Sakat Chauth Vrat Katha: इस व्रत कथा के बिना अधूरा है सकट चौथ का व्रत | Clear Update

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Sakat Chauth Vrat Katha
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हिंदू धर्म में, सकट चौथ व्रत एक विशेष और महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान गणेश और सकट माता की पूजा के साथ मनाया जाता है। इस व्रत का आयोजन स्त्रियां अपने पति और संतान की दीर्घायु, सुख-शांति और सफलता के लिए करती हैं। इस लेख में, हम व्रत के महत्वपूर्ण पहलुओं और पूजा विधि के बारे में विस्तृत रूप से जानेंगे, जिससे आप इसे और भी अधिक महत्वपूर्ण बना सकते हैं।

सकट चौथ व्रत पूजा विधि

सुबह की शुरुआत

व्रत के दिन सुबह सुबह, सिर धोकर नहा लें और हाथों में मेंहदी लगाएं। सफेद तिल और गुड़ के तिलकुट बनाएं। एक पटरे पर जल का लौटा, रोली, चावल, एक कटोरी में तिलकुट और रुपये रखें। जल के लौटे पर रोली से सतिया बनाकर 13 टिक्की करें।

व्रत कथा और गणेश की कहानी

व्रत के दिन, सबसे पहले सकट चौथ व्रत कथा और भगवान गणेश की कहानी को ध्यान से सुनें। इसके दौरान, थोड़ा सा तिलकुट हाथ में ले लें। कहानी सुनने के बाद, एक कटोरी में तिलकुट और रुपये रखकर सासू जी को देखकर पैर छू लें। जल का लौटा और हाथ में रखें तिल उठाकर रख दें।

व्रत का पारण

रात को चांग को देखकर इसी जल से चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। जो व्रत कथा सुनने सुनाएं, उसे कुछ रुपये और तिलकुट दें। व्रत खोलते समय तिलकुट और शकरकंद जरूर खाएं।

सकट चौथ व्रत कथा: गणेश जी की अद्वितीय लीला

गणेश जी की अद्वितीय लीला
गणेश जी की अद्वितीय लीला: (unsplash.com)

एक बार, गणेश जी बाल रूप में थोड़े से चावल और एक चम्मच दूध लेकर पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकले। पृथ्वी पर वे सबसे कहते घूम रहे थे कि कोई मेरी खीर बना दो लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया।

तभी एक गरीब बुढ़िया ने उनकी आवाज सुनी और उनकी खीर बनाने के लिए तैयार हो गई। बुढ़िया के मानने पर गणेशजी ने घर का सबसे बड़े बर्तन में खीर बनाने को कहा। गणेश जी की बाल लीला समझते हुए बुढ़िया ने घर का सबसे बड़ा भगोना चूल्हे पर चढ़ा दिया।

जब गणेश जी ने चावल और दूध भगोने में डाले तो भगोना पूरा भर गया। गणेशजी उस बुढ़िया से बोले कि अम्मा जब खीर बन जाए तो मुझे आवाज दे देना। इसके बाद बुढ़िया के बेटे की बहू ने चुपके से उस भगोने से एक कटोरी खीर चुरा ली और एक कटोरी खीर छिपाकर रख ली।

खीर तैयार होने के बाद बुढ़िया ने गणेश जी को आवाज लगाई। इसके बाद गणेश जी वहां पहुंचे और बोले कि मैंने तो खीर पहले ही खा ली। बुढ़िया ने पूछा कि तुम तो बाहर गए तो तुमने कब खाई तो गणेश जी बोले जब तुम्हारी बहू ने खाई। बुढ़िया को इस बात का पता चला तो उसने गणेश जी से माफी मांगी।

इसके बाद बुढ़िया ने गणेश जी से पूछा कि बाकी बची खीर का अब क्या करें, तो गणेश जी ने कहा कि इसे नगर में बांट दो और जो बचें उसे अपने घर की जमीन में दबा दो। इतना कहकर गणेश जी वहां से चले गए।

अगले दिन जब सोकर बुढ़िया उठी तो उसने देखा कि उसकी झोपड़ी महल में बदल गई है और खीर के बर्तन सोने, जवाहरातों से भरे हुए हैं। भगवान गणेश की कृपा से गरीब बुढ़िया का घर धन दौलत से भर गया।

समाप्ति

इस प्रशिक्षण में हमने विस्तार से सकट चौथ व्रत कथा और पूजा विधि का वर्णन किया है। इसे सही रूप से अनुसरण करके आप इस व्रत को और भी पवित्र बना सकते हैं और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और समृद्धि की प्राप्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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